Monday, April 19, 2010




डेढ़ रुपये में सांबर वडा खाना हो तो कहाँ जाये

दिल्ली में संसद भवन की कैंटीन में
आज भी डेढ़ रुपये में सांबर वडा मिलता है
२२ रुपये में मटन करी वाली थाली
डेढ़ रुपये में पूरी सब्जी और चार रुपये का मसाला डोसा
विश्वास न हो तो 'tribune ' अखबार में छपी इस कैंटीन की रेट लिस्ट देख लें
आज कल की महंगाई के इस दौर में आखिर कोई जगह तो है
जहाँ लोगों की जेब का ख्याल रखा जाता है
बस वहां तक पहुँचने के लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है

Sunday, September 6, 2009


जंगल में मोर नाचा,हमने देखा
लेकिन बन्दीपुर / नागरहोले के जंगल में काबिनी नदी के किनारे बने जंगल लौज तक पहुँचने में रूह काँप गयी
बंगलोर से २३९ km पर बने इस eco resort तक पहुँचने के लिए मैसूर हो कर जाना था
जब मद्दुर के पास कामथ अल्पाहार में डोसा,इडली वड़ा और अक्की रोटी का नाश्ता किया तो उत्साह देखने लायक था
लेकिन जंगल में रास्ता भटक कर भोजन भट्ट परिवार 'Orange county' रिसॉर्ट पहुँच गया
जंगल लौज वालों से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि आप चिंता न करे ,गाडी वहीँ छोड़ दीजिये,
आपको लेने के लिए नाव भेज देंते है ,बात वाजिब लग रही थी
जब नाव में पाँव रखा तो दिल काँप गया, काबिनी नदी( कावेरी की सहयोगी नदी) पूरे उफान पर थी
अच्छा खासा पानी बरस रहा था ,बिटिया रानी तो मस्त थीं लेकिन भोजन भट्ट और संगिनी का दिल काँप रहा था
अकेले नाविक के सहारे डरते डरते यात्रा पूरी हुई
जंगल लौज पहुँच कर दिल आश्स्वस्त हुआ कि ठीक जगह आ गएँ है
१५०० km के क्षेत्र फल में फैले जंगल में हाथी पकड़ने की 'खेद्दा'प्रथा की यादें जुडी हुईं हैं
मैसूर के महाराजा और ब्रिटिश वायसराय का शिकारगाह आजकल वन जीवों के बचाव का काम कर रहा है
सफारी के दौरान चीतल,साम्भर ,हिरन के झुंड निर्भय होकर घूमते दिखे
जंगली भैसें, गौर और हाथी का बच्चा भी दिखा
कई तरह की चिडिया ,जल पक्षी और मोर दिखे
एक जगह गाइड ने जीप रोक कर बाघ के पद चिन्ह दिखाए
शायद सुबह इधर से गुजरे थे महाराज
रुक रुक कर बारिश हो रही थी
काबिनी नदी के पानी को रोकने से बनी झील का दृश्य अद्भुत था
हर तरफ हरियाली देख कर लगता नहीं था की कहीं सुखा भी पड़ा है
लौट कर प्याज के पकोडे और चाय मिली
टेंट ,कॉटेज और कमरों में गरम पानी से स्नान की व्यवस्था थी
रात के भोजन में स्थानीय शैली की सब्जियां थी ,गर्म दाल ,और रसम थी
मीठे के लिए सेवियां और खीर का मिश्रण था
अच्छी नींद आई
अगली सुबह जब फिर नाव से काबिनी नदी में सफारी का प्रस्ताव आया
तो परिवार ने मना कर दिया

Friday, August 28, 2009


भूख के खिलाफ
हर हाथ को मिले काम
हर जनवादी संगठन का यह नारा है
खाद्य पदार्थों की बढती कीमतों और सूखे की मंडराती छाया के समय
हर पेट को भोजन मिले'
संवैधानिक अधिकार हो जाना चाहिए
बढती सामाजिक/आर्थिक असुरक्षा के माहौल में भोजन की सुरक्षा
का अधिकार (food security) मौलिक अधिकार हो
अब समय आ गया है कि परिवार के आधार पर भोजन का निर्धारण बंद हो और हर आदमी को ज़रूरत के हिसाब से खाना मिले
इसके लिए ज़रूरी है कि यह बहस ज़ल्दी से बंद हो
कि कितने लोगों को ३५ किलो अनाज /दो रुपये किलो मिलेगा और
कितनो को २५ किलो/३ रुपये किलो मिलेगा
हर ज़रूरतमंद को PDS से अनाज मिलना चाहिए
६.२ करोड़ लोगों का आंकडा भ्रामक है ,
वंचित जनों की संख्या दुगनी से ज्यादा है
शहरी गरीब /मेहनतकश इस आंकडे से बाहर है
इसके पहले दुर्भिक्ष फैले /भुखमरी की खबरें अखबार और टीवी चैनल की सुर्खियाँ बननी शुरू हों
अनाज के भंडार खोलें जाएँ
कानूनी अधिकार मयस्सर हों
ज़माखोरी नियंत्रण का कानून सख्ती से लागू हो
संभव हो तो 'अन्नपुर्णा रसोई' शुरू की जाएँ
२१ सदी की उभरती महाशक्ति को कुछ प्रयास इस दिशा में भी करने चाहिए

Saturday, August 15, 2009



हे मैया
बंगलोर के जयनगर ४थे ब्लाक में गणेश मंदिर के पास 'मैया' भोजनालय में
पंद्रह अगस्त को भोजन करने के बाद पूरे परिवार की यही प्रार्थना थी
MTR परिवार के सदानंद मैया द्वारा हाल में खोले रेस्तरां में थाली खाने को उत्सुक भोजन भट्ट परिवार का यह हाल था
सदा फिल्टर काफी पीने को तैयार संगिनी काफी के बारे में सुनने को राजी नहीं थी
बिटिया रानी मुश्किल से गाडी तक चल पायीं
आजादी की सालगिरह की छुट्टी होने से जल्दी पहुँचने का फायदा यह हुआ कि चार मंजिलों वाले इस रेस्तरां में तुंरत जगह मिल गयी
सबसे पहले चांदी के ग्लास में अंगूर का रस आया,ठंडा पर चीनी से भरा
फिर चार खानों वाली थाली (रेल की tray जैसी) में चार तरह की सब्जियां परोसी गयीं
उबली चने की दाल का राइ की बघार लगा सलाद आया,करी पत्ता और हरी मिर्च के स्वाद वाला
बिटिया रानी अपनी पसंदीदा मसालेदार कुद्रुन की सब्जी देखकर खुश हो रहीं थी
संगिनी को आलू की गीली सब्जी भाई ,पूरी के साथ खाने में
मुझे नारियल के रसे में बनी मूंग की दाल का स्वाद अनोखा प्रतीत हुआ
इसके बाद गरमा गर्म बीसी बेले भात (संभार सब्जियीं वाला पुलाव) ,
साथ में रायता और तीन तरह के चिप्स और पापड़
दाल वड़ा और पूरण पोली खाने के बाद लगा अब और खाने की गुन्जायिश नहीं है
लेकिन यह तो महज मध्यांतर था
अभी चावल के साथ रसम ,सांबर और दही की बारी थी
हम लोगों ने थाली में परोसे चावल को दो भाग में विभाजित कर लिया
जिससे और न खाना पड़े
पर अभी तो कढ़ी जैसी माजिगे हुली और pineapple गोज्जू (मीठी चटनी जैसा ) भी परसे गए
इसके बाद पालक और साग से भरपूर साम्भर ,पतली रसम और गाढी दही आई
मन तृप्त हो चूका था ,पेट जवाब दे चूका था
लेकिन अभी खीर जैसी काजू किशमिश भरी पायसम और fruit सलाद और आइसक्रीम के लिए भी जगह बनानी थी
हालत यह हुई कि सब ने मिल के कहा
हे मैया

Monday, July 27, 2009


दाल में काला
अरहर की दाल और बैंगन की सब्जी किसी न किसी रूप में पूरे देश में मिल जाती है
चाहे पूर्वांचल का दाल चावल आलू चोखा हो या दक्षिण का अन्ना साम्भर (चावल +साम्भर)
बिना तूर (अरहर ) की दाल के किसी का पेट नहीं भरता
५०% से अधिक जन के प्रोटीन की स्रोत अरहर दाल का दाम पिछले दिनों आसमान चूम रहा है
३४ रुपये किलो मिलने वाली दाल की कीमत आजकल ९५-१०२ रुपये के आस पास है
जिस देश में अच्छे दिनों में मिलने वाली औसत मजदूरी १०० रुपये से ज्यादा न हो
वहां दाल की इस कीमत ने सारे घरेलु बजट को बिगाड़ दिया है
विद्वान जन इस के पीछे पिछले साल की कम पैदावार को मानते हैं
१२.६५ लाख टन से गिर कर 9.71 टन इस साल
म्यांमार और तंजानिया में कम उत्पादन भी जिम्मेवार है
लेकिन इस साल कम बारिश की आशंका से मिल मालिकों की काला बाजारी भी रंग ला रही है
राज्य सरकारें भी बाज़ार से खरीद कर PDS के माध्यम से कुछ राहत पहुँचाने की कोशिश कर रहीं है
पर हालत खास अच्छे नज़र नहीं आते
बच्चों के मिड डे माल से दाल गायब हो गयी है
ज़रूर दाल में काला है

Sunday, July 19, 2009


सिनेमा में भोजन
अगर हृषिकेश मुखर्जी की फिल्मों में बावर्ची बने राजेश खन्ना के आलू परवल काटते किरदार को छोड़ दें
तो हाल में अमिताभ बच्चन के 'चीनी कम' और माधवन के 'रामजी लन्दन वाले ' के शेफ के
रोल ही याद आतें हैं
बाबी फिल्म में डिम्पल कपाडिया के भजिया बनाते हुए बेसन में सने हाथ वाला दृश्य याद है
वरना औसतन हिंदी फिल्मों में भोजन की ओर कम ध्यान गया है
इसका कारण फ़िल्मी मानस में खाना पकाना नौकर का काम है
ये ज़िम्मेदारी माँ/ पतिव्रता नारी को रसोई में खटते दिखाकर पूरी हो जाती है
बैंगलौर से छपने वाली 'फ़ूड लवर्स गाइड' में विदेशी सिनेमा में
भोजन पर आधारित फिल्मों की पूरी लिस्ट छपी है ,कुछ तो मैंने भी देखीं हैं
१.Chocolat -फ्रांस के एक गाँव में जब चॉकलेट बनाने वाली माँ (जूलियट बिनोचे) बेटी आती हैं
जूलियट की पाक कला के सारे दीवाने हो जाते हैं तो शांत ग्रामीण जीवन में उथल पुथल मच जाती है
johny depp और judi dench की अदाकारी से सजी इस फिल्म(२०००) में चॉकलेट बनाने के दृश्य इतने लुभावने है ,अभी भी सोच कर मुहँ में पानी आ जाता है
२.Like Water for chocolate - मेक्सिको की बनी इस फिल्म में नायिका तितो का प्रेमी पेद्रो
उसे छोड़ कर उसीकी सगी बहन से शादी का निर्णय करता है
तितो पेद्रो के दिए गुलाब के फूलों को मिला कर बटेर का ऐसा शोरबा शादी वाले दिन बनाती है
सारे मेहमान उसके स्वाद से बेचैन हो उठते हैं
इसके अलावा ये फिल्में भी देखिये और मुग्ध हो जाईये
3.Eat Drink Man woman-
4.Mostly Martha
5.Solino
6.Big Night
सिनेमा में भोजन का मतलब पॉप कॉर्न ही नहीं होता

Friday, July 3, 2009


बिटिया रानी ने पास्ता बनाया
पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते हैं
सो बिटिया रानी ने सवा साल की उम्र में रोटियां बेलने की जिद पाल ली
बाद में कंप्यूटर पर खाने के व्यंजनों के चित्र बनाने लगीं
जिसकी परिणति उनकी किताब' Father and daughter cook it up for mom' में हुई
आजकल बचपन की उन नादानियों को देख कर शरमा जाती हैं
हाल में टीवी पर रितु डालमिया का कार्यक्रम 'इटालियन खाना ' देखकर उत्साहित हुईं
पहले प्रयोग में पास्ता बनाना चाहतीं थीं
भोजन भट्ट ने उन्हें चाकू के इस्तेमाल और गैस जलाने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है
सो उन्हें इन दो कामों में मदद की ज़रूरत पड़ी
आईटीसी का Sunfeast का गेहूं से बना Penne पास्ता उबाला गया
olive आयल में कटे लहसुन को तल कर और सब्जियां और टोफू मिलाया गया
उसमें पास्ता डालकर ऊपर से चीज़ छिड़की गयी
जब oregano छिडकने की बारी आई तो गलती से शीशी का मुंह खुल गया
और सारा पास्ता हरे रंग का दिखने लगा
जिसका रास्ता कुछ पास्ता को पानी में धुल कर निकाला गया
लेकिन स्वाद मज़ेदार था