Friday, July 3, 2009


बिटिया रानी ने पास्ता बनाया
पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते हैं
सो बिटिया रानी ने सवा साल की उम्र में रोटियां बेलने की जिद पाल ली
बाद में कंप्यूटर पर खाने के व्यंजनों के चित्र बनाने लगीं
जिसकी परिणति उनकी किताब' Father and daughter cook it up for mom' में हुई
आजकल बचपन की उन नादानियों को देख कर शरमा जाती हैं
हाल में टीवी पर रितु डालमिया का कार्यक्रम 'इटालियन खाना ' देखकर उत्साहित हुईं
पहले प्रयोग में पास्ता बनाना चाहतीं थीं
भोजन भट्ट ने उन्हें चाकू के इस्तेमाल और गैस जलाने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है
सो उन्हें इन दो कामों में मदद की ज़रूरत पड़ी
आईटीसी का Sunfeast का गेहूं से बना Penne पास्ता उबाला गया
olive आयल में कटे लहसुन को तल कर और सब्जियां और टोफू मिलाया गया
उसमें पास्ता डालकर ऊपर से चीज़ छिड़की गयी
जब oregano छिडकने की बारी आई तो गलती से शीशी का मुंह खुल गया
और सारा पास्ता हरे रंग का दिखने लगा
जिसका रास्ता कुछ पास्ता को पानी में धुल कर निकाला गया
लेकिन स्वाद मज़ेदार था

Thursday, June 18, 2009


एक हफ्ते में साढ़े तीन किलो वज़न घटाया
भोजन भट्ट सदा से गोल मटोल रहे हैं
व्रत द्वारा शरीर को कष्ट देने में यकीन नहीं रखते
लेकिन संगिनी का आग्रह मान कर इस बार इक्कठे डाइट पर जाने का विचार किया
G M Diet ,शर्त यह थी कि भूखे नहीं रहेंगे
एक सप्ताह तक मनोहारी प्रयोगों के बाद देखा तो दोनों लोगों का वज़न करीबन साढ़े तीन किलो घट गया था
दर असल अमरीकी कम्पनी जनरल मोटर्स ने Johns Hopkins Research Centre की सहायता से अपने कर्मचारियों और उनके परिवार जनों की मदद के लिए यह Diet बनाया था
हम लोगों ने उसमे कुछ तब्दीलियीं की ,इसके शाकाहारी संस्करण की खोज में
हर दिन दस ग्लास पानी पीजिये,चाय ,काफी, रस रंजन से परहेज कीजिये
सब्जियों का मनोहारी सूप अधिक मात्रा में बना लीजिये ,भूख लगने पर पीते रहें
आप भी लुत्फ़ उठाइए
पहला दिन - केले की सिवाय सारे फल खा सकते हैं,खरबूज और तरबूज दिल खोल कर खाईये
दूसरा दिन- सारी सब्जियां खा सकते हैं ,उबले/bake किये हुए आलू से शुरुआत कीजिये,चाहें तो थोडा सा मक्खन स्वाद के लिए डाल लीजिये ,हम लोगों ने ढेर सारा सलाद ,उबली और ग्रिल की सब्जियां खायीं
तीसरा दिन- आज फल और सब्जियां मिला जुला कर सेवन करें , आलू और केले को छोड़ कर
हम लोगों ने fruit सलाद बनाया ,सुबह नाश्ते में मटर की घुघनी खायी
चौथा दिन- आज केवल दूध और केले खाने की अनुमति है ,सूप भी पी सकते हैं
हम लोगों ने केले की चाट और banana shake पिया
पांचवां दिन-आज टमाटर और राजमा /सोया/टोफू (सोया पनीर) खा सकतें हैं ,पानी भी ज्यादा पीना होगा
हम लोगों ने नाश्ते में ग्रिल टमाटर और खाने के लिए दक्षिण भारतीय शैली का 'टोमाटो राइस' बनाया
कडाही में प्याज,और कटे टमाटर को भुन कर,हलके नमक मिर्च के साथ उबले चावलों में मिला कर खाया
बहुत स्वादिष्ट लगा ,साथ में राजमा ,सोया और टोफू का सलाद खाया ,निम्बू का रस छिड़क कर
छठां दिन- आज आप सब्जियां और सीमित मात्रा में चावल खा सकते हैं
सदाबहार मटर और corn की घुघनी और बचा हुआ 'टोमाटो राइस' खाया
सातवां दिन- आज के दिन बिना पोलिश किया चावल और सब्जियां खा सकते हैं ,फलों के जूस की भी इजाज़त है
हम लोगों ने सोया,मटर का पुलाव बनाया ,बिना घी तेल का
इस पूरी प्रक्रिया में ख़ास कष्ट नहीं हुआ
देखें कितने दिन यह वज़न बरक़रार रहता है

Monday, June 8, 2009


भोजन का पंजाबीकरण
हाल में उस्ताद वीर संघवी साहब केरल के वायनाड क्षेत्र के किसी होटल में शूटिंग कर रहे थे
भोजन काल में जब उन्होंने उम्मीद की
शायद केरल का पारंपरिक भोजन इस आतंरिक भाग में उपलब्ध होगा
अप्पम और stew मिले न मिले ,मीन मोइली तो ज़रूर मिलेगी
लेकिन केवल बटर चिकन ,काली दाल और पनीर की सब्जी उपलब्ध थी
उनका निष्कर्ष था कि यश चोपडा की फिल्मों के प्रभाव के चलते अब सारा देश पंजाब मय हो गया है
करवा चौथ के व्रत की कथा सारे हिंदुस्तान को मालुम है
तमिलनाडु तक में सलवार कमीज अब सामान्य पहनावा है
पता नहीं उनकी थीसिस कितनी सटीक है
लेकिन भोजन के मामले में उनका तीर सही निशाने पर है
आजकल हिन्दुस्तान में कहीं भी बाहर खाने का मतलब है
तंदूरी रोटी/नॉन ,काली दाल और शाही पनीर
नान वेज का मतलब कबाब और तंदूरी चिकन
होटल का मतलब ढाबा
देश के अलग हिस्सों में स्थानीय भोजन की समृद्ध परंपरा रही है
लेकिन आजकल रंग बदले हैं
मध्य प्रदेश में आप किसी मझोले साइज़ के रेस्तरां में दाल बाफला मांग कर देखिये
मंगलोर में अक्की रोटी और नीरा डोसा पूछिये
लखनऊ में लिट्टी दाल बाटी चोखा के बारे में जानकारी मांगिये
गोवा में कुम्बी दिशेस का पता करिए
मिले न मिले पंजाबी थाली ज़रूर मिलेगी
विदर्भ में सावजी होटल और दक्कन में मिलटरी होटलों में नान वेज खाने का रिवाज रहा है
लेकिन आजकल कहीं इसका ज़िक्र नहीं आता
भोजन भट्ट भी ढाबा पुराण खोल कर बैठ जाते हैं
अस्सी के दशक में रामायण सीरियल ने राम की छवि के लिए जो काम किया था
आप अरुण गोविल की धनुर्धारी छवि से हट कर राम जी की कल्पना नहीं कर सकते
आजकल फिल्मों/मीडिया की मदद से खाने की भी वही हाल है
इसमें हर शहर में खुले मोती महल/शान ए पंजाब जैसे होटलों का भी खासा योगदान है
लगता है जायका बदल रहा है

Saturday, May 30, 2009


नागपुर की यादें
१९८९ में अगस्त की बात है .
श्रीनगर में बैंक में नौकरी कर रहा था
अभी कश्मीर वादी आतंकवाद की गिरफ्त में नहीं आई थी
एक दिन अचानक तार मिला कि नयी नौकरी नागपुर में लग गयी है
पागल खाना चौक के सामने बने संस्थान में २० अगस्त को हाज़िर होइए ,
जहाँ दो साल तक ट्रेनिंग दी जायेगी
उन दिनों संस्थान की पत्रिका 'The File' में गाहे बगाहे स्थानीय भोजनालयों के बारे में लिखता था
आखिरी अंक में सारे होटलों की फेहरिश्त बनाने की कोशिश की ,अगले बैच की मदद के इरादे से
हाल में 'The File' का पुराना अंक मिल गया ,आप भी देखें ,बीस साल बाद इन में से कितने होटल बचे हैं
१. अलंकार- सीता बलडी- ६ रुपयें में विशालकाय पेपर मसाला डोसा मिलता था ,जो दो लोगों के लिए पर्याप्त था
२.अशोका- सदर- मेस बंद होने पर अधिकाँश यार दोस्त यहीं दिखते थे,भुना मुर्ग लाजबाब लगता था
३.अर्जुन- सदर -रस रंजन के शौकीन मित्र इसकी पहली मंजिल पर मिलते थे
४.आर्य भवन- सीता बलडी- शाकाहारी व्यंजन और थाली मिलती थी -पनीर भरता याद है
५.बब्बू का होटल-मोमिन पुरा- सड़क छाप जगह में मटन बिरयानी मिलती थी -स्वाद उम्दा था
६.जगत-सीता बलडी- तीन मंजिले होटल में खाया पाव भाजी और कुल्फी फलूदा याद है
७.नम्रता- सदर में मोतीमहल होटल के पास बना सरदार जी का ढाबा अनादि वर्माजी को काफी पसंद था पंद्रह रुपये में एक प्लेट बटर चिकन मिलता था और २६ रुपये में तंदूरी मुर्ग
८. नानकिंग- -सदर -छोटी सी जगह में चीनी मूल के परिवार का साझा प्रयास
.मोती महल -पारंपरिक पंजाबी खाने का अड्डा- यहाँ खा कर लगता था कि देश में खाने के तेल की किल्लत नहीं है
१०.पर्ण कुटीर- eTHNIC EATERIES का सूत्रधार रेस्तरां -यहां महाराष्ट्रीय थाली में ज्वार रोटी,भाखरी ,पंचामृत सब्जी और कचुम्बर सलाद मिलता था -बाद में होटल के बाहर पान की दूकान पर पक्षियों के आकार के पान खाए जाते थे
बीस साल बाद मित्रों का नागपुर में फिर से मिलने का इरादा है ,देखें क्या कुछ बदला है

Monday, May 18, 2009


MTR में पार्टी
बजट पार्टी हमारे दफ्तर की परंपरा है ,जो वित्तीय वर्ष के पूरे होने पर दी जाती है
मेरे सुझाव पर सहयोगी इसे ८५ वर्ष पुराने MTR रेस्तरां में लंच करने पर राजी हो गए
आखिर बंगलोर के इस लैंडमार्क रेस्तरां में भोजन करना सबकी दिली ख्वाहिश रहती है
१९२४ में मैया बंधुओं द्वारा स्थापित यह भोजनालय इस पीढी में हेमामालिनी मैया बखूबी चला रहीं हैं
उदिपी ब्राह्मण शैली के भोजन की परंपरा जारी है
पुरानी दो मंजिला बिल्डिंग के आगे घंटों कतार लगती है
भोजन अनुरागी ग्राहकों की ,जो इसके भोजन की शुद्धता के कायल हैं
अंदर दीवारों पर रवि वर्मा के तेल चित्र
लगता है कि दुनिया कहीं थम सी गयी है ,कुछ भी बदला नहीं
फर्नीचर के नाम पर लाल प्लास्टिक की कुर्सियां
वेटिंग वाले सज्जन लकडी की बेंच पर बैठे अपनी बारी का इंतज़ार करतें हैं
घुटनों तक मोड़ी धोते पहने ब्राह्मण वेटर जनेऊ का विज्ञापन करते प्रतीत होते हैं
पुरानी दो मंजिला बिल्डिंग के आगे घंटों कतार लगती है गुणी ग्राहकों की
जो इसके भोजन की शुद्धता के कायल हैं
उन्हें इंतज़ार रहता है शुद्ध घी में पके भारी भरकम मसाला डोसा का
सूजी की बनी रवा इडली का ,जिसके साथ पाल्या (गीलीसब्जी) मिलती है,साम्भर नहीं
मीठे के लिए केसरी बाथ और बादाम हलवा
साथ में चाँदी के ग्लास में फिल्टर काफी
आपातकाल के दौरान जब सरकार ने फ़ूड कण्ट्रोल एक्ट के तहत
इडली/वड़ा, डोसा के रेट ज़बरदस्ती कम कर दिए थे ,
तो इस कीमत पर अपनी गुणवत्ता से समझौता करने के बजाय मालिकों ने होटल बंद कर पिसे मसालों की दूकान खोल ली ,जो आज एक अलग बड़ा व्यवसाय है
लेकिन लंच के समय केवल थाली मिलती है
उस दिन शुरुआत हुई चाँदी के ग्लास में अंगूर के रस से
फिर चाँदी कि थाली मैं सबसे पहले कसुम्ब्री- भीगी मूँग की दाल का सलाद आया
बारी थी सादे दोसे की ,जिसे नारियल की चटनी के साथ परोसा जा रहा था
दोसे वाली आलू की सब्जी की जगह दो तरह का सूखा पाल्या आया .
घिसे नारियल के मसाले में पकी पत्ता गोभी और बीन्स की सब्जियां ,जिसमे राई का बघार लगा था
नया अनुभव था इस तरीके से डोसा खाना
अब बारी थी पुलाव की -आज के दिन कर्णाटक का विशिष्ट व्यंजन बीसी बेले बाथ -साथ में खीरे का रायता और आलू चिप्स , मसालेदार गरमा गर्म पुलाव खाकर मीठे की तलब हुई
ताज़ा बनी जलेबी और खीर जैसी पायसम हाज़िर थी
इसके बाद चावल के साथ साम्भर और रसम
अंत में MTR का प्रसिद्ध कर्ड राइस ,जिसमे अनार के दाने दिख रहे थे ,स्सथ में निम्बू का अचार
अभी चाँदी की कटोरी में fruit सलाद के साथ वनिला आइस क्रीम भी आनी बाकी थी
फिर आखिर में पान
सहयोगी खुश थे ,अगला वित्तीय वर्ष भी अच्छा बीते

Tuesday, May 12, 2009


वाह ला पिआजा
अगर गाँधी परिवार को दिल्ली में अच्छा इटालियन खाना चाहिए
तो दिल्ली के hyatt होटल के 'ला पिआजा ' रेस्तरां में ही जाना पड़ता है
आखिर लगातार दो सालों से इसे दिल्ली के सर्वश्रेष्ट इटालियन भोजन का खिताब मिल रहा है
गुणी जन तो इसे हिंदुस्तान के सबसे बढ़िया इटालियन भोजन का अड्डा बतातें हैं
पांच तारा होटल के अन्दर बने इस रेस्तरां में यूरोपीय sidewalk कैफे जैसा माहौल है
बीचो बीच बने लकडी के कोयले के ओवेन में शेफ लोग पिज्जा लगाते दिखते हैं
ढेर सारे विदेशी ग्राहकों की उपस्थिति विश्वास दिलाती है कि अच्छे इटालियन खाने की तलाश में
हम लोग सही जगह पहुँच गएँ हैं
वैसे तो पूरे देश में तंदूरी और चीनी खाने के बाद अब इटालियन खाने की धूम मची हुईं है
हर गली के नुक्कड़ पर मिलने वाले अमूल पिज्जा की तरह
मध्यवर्गीय शादियों में भी live पास्ता काउंटर का हों अनिवार्य सा हैं
जहाँ टमाटर के लाल सॉस या क्रीम /चीज़ के सफ़ेद सॉस में
बेबी corn, पेप्पर,मशरूम और broccoli जैसी विदेशी सब्जियां तली जाती हैं
और आपकी प्लेट में गार्लिक ब्रेड या ओलिवे आयल में भीगे toast के साथ पेश की जाती हैं
आप भी खुश,मेजबान भी खुश
लेकिन इटालियन भोजन में पास्ता /पिज्जा से आगे भी बहुत कुछ है
इसमें इटली के अलग अलग क्षेत्रों (जैसे सिसिली) के अलावा रोमन /मुस्लिम सांस्कृतिक जीवन की छाप भी है
mediterrean समुद्र के पास होने से समुंदरी मछली और जैतून के तेल के प्रयोग से खाने की अलग रंगत है
यहाँ पर खाना कई कोउर्सेस में पेश करते हैं (भारत में बंगाली भोजन की तरह)
सबसे पहले antipasti, - भोजन से पहले शुरुआती व्यंजन
जिसमें cured meats, ऑलिव्स , भुने लहसुन , pepperoncini, मुशरूम्स , anchovies, artichoke hearts, तरह तरह की चीज़ ,peperone (marinated small green bell peppers)
इस सबमें ओलिवे आयल का प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल होता है
इसके बाद primo - first course आता है जो पेट भरने वाली महत्वपूर्ण डिश होती है
जैसे risotto (खिचडी जैसी) या pasta,gnocchi, polenta या soup.
"second course",में मांस या मछली की बनी कोई डिश होती है
"side डिश". में हरा भरा सलाद या हलकी तली सब्जियां मिलती हैं
आखिर में मीठे के नाम पर पहले चीज़, कटे फल फिर केक और कुकिएस
आखिर में काफ़ी
हम लोग तो ला पिआजा के ओवेन से मंत्र मुग्ध थे
उसमे ताजा bake किये हुए बन(Focaccia )के साथ कटे टमाटर,पिसे लहसुन का olive आयल में पगी चटनी जैसी साइड डिश बार बार खाते रहे
यह complementary था
साथ में पतली margherita पिज्जा ,हलकी भुनी सब्जियां
और दो पास्ता की डिश (spaghetti और penne ) मगायीं गयीं
भोजन दिव्य था ,पर ऐतिहासिक नहीं
पांच लोगों का बिल ३८९२ रुपये का था
अब पता चला कि इस होटल में विदेशी ग्राहक ही क्यों ज्यादा आते हैं

Sunday, April 26, 2009


बंद हो रहीं हैं किताबों की दुकानें

अभी दिल्ली के श्रीराम सेंटर के वाणी प्रकाशन दुकान बंद होने के सदमे से उबर नहीं पाया था
पता चला कि बंगलोर की प्रिमिएर बुक शॉप भी बंद हो रही है
चर्च स्ट्रीट पर ६०० sqft की छोटी सी दुकान में पचास हज़ार किताबें बेतरतीबी से रखी/ठुंसी पड़ी थी
38 साल पुरानी इस दुकान में न तो काफी मिलती थी ,न संगीत की CD या ग्रीटिंग कार्ड
कंप्यूटर भी नहीं था
आज जब हर माल में बनी airconditioned बुक शॉप में कंप्यूटर लगें हैं
शायद ही किसी सहायक को यह भी पता होता है कि अमुक किताब उसकी दुकान में है भी या नहीं
पर प्रिमिएर के मालिक टी एन शानबाग को अपनी दुकान के हर कोने में रखी हर किताब की जानकारी थी
अपनी जिंदगी में इतना सुसंस्कृत,शालीन पुस्तक प्रेमी मालिक मैंने नहीं देखा
१९९१ में पहली बार इस दुकान में कदम रखा था किसी दुर्लभ किताब की तलाश में
शानबाग साहब ने न केवल किताब ढूंढ़ निकाली बल्कि उस लेखक की कई ऐसी किताबों के बारे में बताया जिन्हें मैं जानता भी नहीं था
बिल बनाते समय बिना मांगे १०% discount भी दे दिया
मैं अभिभूत था
दुकान किराये की थी ,बढ़ता किराया न दे पाने में असमर्थ शानबाग साहब ने प्रिमिएर बुक शॉप को बंद कर
अपनी बेटी के पास ऑस्ट्रेलिया में बसने का इरादा कर लिया है
अगर इस देश में सम्मान सही लोगों को दिए जाते
तो ३८ सालों तक पुस्तक प्रेमियों की सेवा के लिए इन्हें पद्म श्री से नवाजा चाहिए था

हाल में भोजन पर आधारित तीन किताबें पढ़ी
चित्रीता बनर्जी की 'Bengali Cooking: Seasons and Festivals '
बंगलादेशी मुस्लिम परिवार में ब्याही भद्र महिला ने बंगाल के दोनों भागों के भोजन और रस्मो रिवाज का रोचक चित्रण किया है ,पर इनकी संपादित 'EATING इंडिया' बेकार लगी
पुरानी दिल्ली के कायस्थ परिवार की दो बहनों की किताबें
शीला धर की 'रागा न जोश' और मधुर जाफरी की 'CLIMBING THE MANGO TREES'
एक ही समय को दो बिलकुल अलग नज़रिए से देखती हैं
शीला धर की किताब ज्यादा रोचक है, संगीतकारों की निजी जिंदगी के अनमोल वर्णन हैं
अब इंतज़ार है जिद्दु कृष्णामूर्ति के सहायक रहे MiCHAEL kROHNEN की 'THE kitchen chronicles' की
अगर प्रिमिएर बुक शॉप खुली होती तो शानबाग साहब ज़रूर खोज निकालते

Sunday, April 19, 2009

महानगर में भूखे पेट
जब अखबार और टीवी चैनल बड़े शहरों के नए रेस्तौरंतों की चटखारे वाली खबरों से पटे हैं
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी 'हर्ष मंदर' ने 'हिन्दू' अखबार में बेसहारा लोगों की एकाकी ज़िन्दगी की भयावह तस्वीर खींची हैं पटना , दिल्ली , मदुरै और चेन्नई की सड़कों पर पिछले दो सालों में बेघर लोगों के सर्वेक्षण से
यह साफ़ है कि मजबूर लोग किसी की दया या मेहरबानी पर जिंदा नहीं रहना चाहते
बीस फीसदी लोग भूखे रहते हैं पर किसी रिश्तेदार या मंदिर की सीढियों पर हाथ फैलाते नजर नहीं आते
महानगरों की जगमगाती रोशनी के बीच ये भूखे चेहरे आपको शायद नहीं दीखते
मध्य वर्ग के सुरक्षा कवच में बैठे हम आप इन बेसहारा लोगों को निगाह से दूर रख कर भूल जाना चाहतें हैं
बड़े लोगों की नज़र में सड़क के किनारे पड़े ये लोग नए भारत की चकमक छवि पर धब्बा हैं
ज्यादातर बेघर बच्चे भोजन खरीद कर खातें हैं

बुरे दिनों में दरगाह,गुरुद्वारा या मंदिर का प्रसाद इनका सहारा बनता हैं
छोटे बच्चे कूड़ेदान में खाना खोजने को अभिशप्त हैं
एक बेसहारा महिला हर सुबह दो रुपये की चाय पीकर कूड़े /फटे कपडे खोजने निकल जातीं हैं
दिन भर की हाड तोड़ मशक्कत के बाद अगर आमदनी हुई तो
आठ रुपये में सड़क के किनारे पर ठेले वाले से एक प्लेट चावल दाल और सब्जी खरीदती हैं
शाम को तीन रोटियां छह रुपये में मिल जाती है
ये सब कुछ तीस रुपये की औसत आमदनी से निकलना पड़ता है
. कभी कभी होटलों के बाहर समोसों के टुकडों या बिस्कुट से काम चलाना पड़ता है
कई दिन एक बार भी भोजन मुश्किल से मिल पाता है
बड़े शहर की निर्मम ज़िन्दगी का एक पहलू
हर्ष मंदर साहब को साधुवाद

Wednesday, April 8, 2009


पनीर पुराण
जब इंगलैंड की राष्ट्रीय डिश के रूप में 'चिकन टिक्का मसाला' को मान्यता मिल चुकी है
क्यों न भारत की सबसे पसंदीदा डिश का खिताब 'पनीर बटर मसाला' को दे दिया जाये
आखिर हिंदुस्तान के हर कोने में यह मिल जाती है
बनाने का तरीका चाहे जो हो , दिखती एक जैसी है
लाल टमाटर के सास में पके पनीर के टुकड़े
उसमें मक्खन और फ्रेश क्रीम का समावेश
अदरक लहसुन और काजू के पेस्ट का असर भी दिखता है
सजावट के लिए हरी धनिया के पत्ते
रोटी या नॉन के साथ लुत्फ़ उठाईये
इस डिश में कुछ तो ख़ास होगा जो हर ढाबे /रेस्तरां के मेनू में होना इसका लाजिमी है
सुना है कि एक बार जब भोजन भट्टों के आध्यात्मिक गुरु उदिपी पधारे थे
उनके स्वागत में जब 'पनीर बटर मसाला' पेश की गयी
तो उन्होंने मालिक से पूछा क्या आप लोग भी इस industrial waste को खाते हैं
जवाब मिला कि हम लोग तो खुद नीर डोसा और सूखा चिकन (मसाले में भुना हुआ) खाने वाले हैं
आप को भी हम पेश कर देते
पर दिल्ली से आये हुए गेस्ट इसके बिना संतुष्ट नहीं होते
मेरा निजी अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा है
बचपन में छेने की सब्जी शादी ब्याह के भोज में खायी थी
पर पनीर का प्रचलन तब नहीं था
शायद अमूल डेरी की दुग्ध क्रांति का असर उत्तर प्रदेश के शहरों तक नहीं पहुंचा था
लेकिन नौकरी में आने के बाद लगा
पंजाब /हरियाणा और दिल्ली में किसी शाकाहारी आदमी के लिए
पनीर की सब्जी खाने के बिना जीना असंभव है
बंगलोर में १९९१ के दौरान दफ्तर के मुलाजिम पनीर की गुणवत्ता से अनभिज्ञ थे
लेकिन अब तो हर जगह पनीर उपलब्ध है
अपने अनेक रूपों में
मुझे भी आदत डालनी पड़ेगी

Monday, March 23, 2009


बिसी बेले भात यानी गरमा गरम दाल चावल
हम चार मित्रों की नई नई शादी हुई थी
तय किया गया कि बारी बारी से हरेक के घर भोजन का कार्यक्रम रखा जायेगा
इसी बहाने सबकी मेल मुलाकात भी बनेगी
इस कड़ी में पहल की आंध्र प्रदेश के साथी ने
उनक पत्नी कर्णाटक की थीं
भोजन की मेज पर पूरी आलू के साथ राइस कुकर भी रखा था
सोचा शायद पुलाव या तहरी बनी होगी
लेकिन ढक्कन खुलने पर साम्भर के मसाले सी खुशबू आई
झाँका तो दाल चावल और सब्जिया दिखीं
ऊपर से भुने काजू और मूंगफली भी नज़र आई
करी पत्ता और राई की छौंक लगी थी
ऊपर से आलू के चिप्स डाले हुए थे
प्लेट में डाला तो सारा कुछ गीला सा लगा
सोचा ज्यादा पानी डल गया होगा
लेकिन स्वाद अदभुत था
बिसी माने गरम ,बेले माने दाल और भात यानी चावल
गरमा गरम दाल चावल सब्जी की इस डिश का जायका ज़बान पर जो चढा
तो हर शादी /दावत में इंतज़ार रहता था कर्णाटक की इस यादगार डिश का
इस रविवार घर पर बनायीं गयी यह डिश
राइस कुकर को चावल, दाल, कटी हुई सब्जिया ,साम्भर पाउडर, इमली का रसा ,घी और ढेर सारा पानी डाल कर बंद कर दिया गया
एक घंटे बाद छौंक लगा कर खीरे के रायता के साथ इसका लुफ्त उठाया गया
रविवार की छुट्टी सार्थक रही
(विधि www.bhojanbhattkirasoi.com पर)
चित्र साभार